परम पूज्य सराकोद्धारक, राष्ट्र संत, षष्ठम पट्टाचार्य 108 श्री ज्ञानसागर जी महाराज (ससंघ) के पावन सानिध्य में

धर्म नगरी एवं ताज नगरी आगरा मे एक बार फिर लिखा जा रहा है एक नया इतिहास, होने जा रहा है विश्व की प्रथम रत्नमयी परिकर युक्त दिगम्बर जैन प्रतिमा का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव Agra Digamber Jain Panchkalyanak

प्रमुख अतिथि
  • श्री राम शंकर कठेरिया सांसद आगरा
  • श्री राम सकल गुर्जर मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार
  • श्री जगन प्रसाद गर्ग विधायक आगरा
  • श्री योगेंद्र उपाध्याय विधायक
  • श्रीमती सरिता एम के जैन रा. अ. तीर्थ क्षेत्र कमैटी
  • श्री निर्मल जी सेठी अध्यक्ष दि जैन महासभा दिल्ली
  • श्री अशोक जैन बड़जात्या, अध्यक्ष महासमिति इंदौर
  • श्री विजय जैन लुहाड़िया अहमदाबाद
  • श्री पवन जैन IPS भोपाल
  • श्री साहु अखिलेश जैन टाइम्स ग्रुप दिल्ली
  • श्री जमुना लाल हापावत मुम्बई
  • श्री पंकज जैन पारस चैनल दिल्ली
  • श्री नीरज जैन जिनवाणी चैनल

Program Schedule
DAY 1
24 फरवरी
ध्वजारोहण, घटयात्रा
DAY 2
25 फरवरी
गर्भकल्याणक (पूर्व रूप)
DAY 3
26 फरवरी
गर्भ कल्याणक (उत्तर रूप)
DAY 4
27 फरवरी
जन्म कल्याणक
DAY 5
28 फरवरी
भगवान नेमिनाथ की बारात
DAY 6
1 मार्च
दीक्षा कल्याणक
 
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News & Announcements
  • पंचकल्याणक के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए महिलाओं ने बनाया अलग अलग dress code
  • आगरा में पंचकल्याणक महोत्सव के लिए चल रहीं हैं, जबरदस्त तैयारीयां, महोत्सव में सान्निध्यता देने राष्ट्रसन्त आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज का हुआ आगरा में प्रवेश! 16-Feb-2017
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पंचकल्याणक ?
इस भरतक्षेत्र के आर्य खंड में चतुर्थ काल में हमेशा २४ तीर्थंकरों का अवतार होता रहता है। कोई भी महापुरुष तीर्थंकर के पादमूल में रहकर दर्शनविशुद्धि आदि सोलह कारण्सा भावनाओं को भाते हैं और उनके प्रसाद से तीर्थंकर प्रकृति का बंध करके स्वर्गों में देवपद को प्राप्त कर लेते हैं। उन तीर्थंकर होने वाले के मत्र्यलोक में गर्भावतार के छह माह पूर्व ही माता के आंगन में इंद्र की आज्ञा से कुबेर रत्नों की वर्षा करने लगता है। श्री, ह्री धृति, लक्ष्मी, कीर्ति आदि निन्यानवे१ विद्युत्कुमारी और दिक्कुमारी देवियाँ भी छह माह पूर्व ही बड़े हर्ष से वहाँ आ जाती हैं। और जिनेंद्रदेव के होनहार माता—ाqपता को नमस्कार करके अपने आने का कारण निवेदन करती हैं। पुन: नाना प्रकार से माता कर सेवा में तत्पर हो जाती हैं। कोई माता के गुणों का गान करती हैं, कोई पैर दबाती हैं। कोई दिव्य भोजन की व्यवस्था करती हैं, कोई छत्र लगाती हैं, कोई चमर ढोरती हैं, कोई तलवार, चक्र और स्वर्णमयी बेंत हाथ में लेकर द्वारपाल का काम करती हैं

 


विश्व की प्रथम रत्नमयी परिकर युक्त दिगम्बर प्रतिमा के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में पधार कर पुण्यार्जन कीजिये